Saturday, 7 February 2015

गारनिशी आदेश

गारनिशी आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के नियम 46ए-46ई के आदेश XXI, धारा 61 के तहत जारी किए जाते हैं।
यह आदेश निर्णीत लेनदार के आवेदन पर न्‍यायालय द्वारा उस स्थिति में जारी किया जाता है जब देनदार उसके देय ॠण को चुकाने से मना कर देता है।
गारनिशी आदेश निर्णीत देनदार का खाता रखने वाले बैंक पर जारी किया जाता है।
इसमें तीन पक्ष होते हैं :
क) र्नि‍र्णित देनदार बैंक का खातेदार जो अपने देय ॠण को चुकाने से इंकार कर रहा है।
ख) निर्णीत लेनदार जिसकी पहल पर यह आदेश जारी हुआ है।
ग) गारनिशी वह व्‍यक्ति / संस्‍था / विभाग जिसके पास निर्णीत देनदार की निधि रखी हुई है।
गारनिशी आदेश प्राप्‍त होने पर निर्णीत देनदार के जमाखाते निलंबित हो जाते हैं तथा बैंकर उसमें से कोई भुगतान नहीं कर सकता।

गारनिशी आदेश दो चरणों में जारी किया जाता है।
क) आदेश सापेक्ष और
ख) निरपेक्ष आदेश
सापेक्ष आदेश इसमें न्‍यायालय बैंकर से यह कहता है कि देनदार के खातों में सभी लेनदेन रोक दे तथा देनदार से स्‍पष्‍टीकरण मोंगे कि उसके खाते में रखी गई निधियों को प्रयोग निर्णीत कर्ज को भुगतान के लिए क्‍यों न किया जाए।
निरपेक्ष आदेश
जब बैंक द्वारा प्रस्‍तुत रिपोर्ट के आधार पर न्‍यायालय निर्णीत लेनदार के दायित्‍व की चुकौती के लिए समस्‍त अथवा आंशिक शेष रोकने का आदेश जारी करता है।
प्रयोज्‍यता
- ऐसे खातों पर जो उसी रूप एवं उसी क्षमता में हो।
- एकल नाम पर जारी आदेश संयुक्‍त खातों के शेष पर लागू नहीं होंगे।
- संयुक्‍त खातों में प्राप्‍त आदेश व्‍यक्तिगत खातों पर लागू होंगे परन्‍तु विपर्यय संभव नहीं है।
- व्‍यक्तिगत नाम में जारी आदेश एकल स्‍वामित्‍व फर्म पर लागू होंगे तथा इसके विपरीत क्‍योंकि दोनों खाते उसी रूप तथा उसी क्षमता में हैं।
- साझेदार फर्म के नाम आदेश साझेदारों के व्‍यक्तिगत खातों पर भी लागू होंगे परन्‍तु इसका विपर्यय संभव नहीं है।
- भिन्‍न-भिन्‍न क्षमताओं में खोले गए खातों पर आदेश लागू नहीं होंगे भले ही हस्‍ताक्षरकर्ता वही हों।
- आदेश केवल जमा शेष पर प्रयोज्‍य हैं।
- आदेश भावी जमा हेतु प्रयोज्‍य नहीं है।
- वास्‍तविक भुगतान से पूर्ण आदेश प्राप्‍त हो जाने पर बैंक को भुगतान रोक देना चाहिए भले ही भुगतान के लिए चेक पारित कर दिया गया हो और टोकन जारी कर दिया गया हो।
- गारनिशी आदेश विदेश में रखी धनराशि पर लागू नहीं होता।
- सुरक्षित अभिरक्षा तथा लाकर में रखी वस्‍तुओं पर लागू नहीं होता।
- ट्रस्‍ट के खाते को अटैच नहीं किया जा सकता भले ही कोई ट्रस्‍ट निर्णीत देनदार हो।
- बैंक में विशेष उद्देश्‍य से रखी प्रतिभूतियां इस आदेश से अटैच नहीं की जा सकती।
- गारनिशी आदेश मृतक के खातों पर लागू होता है किन्‍तु दिवालिए व्‍यक्ति पर नहीं।
- गारनिशी आदेश ॠण सीमा अथवा आहरण अधिकार के अप्रयुक्‍त अंश पर लागू नहीं होता है।
- बैंकों का समंजन का अधिकांश बड़ा है इसलिए बैंक गारनिशी आदेश के तहत किसी दायित्‍व को पूरा करने से पहले समंजन के अधिकार का उपयोग कर सकते हैं।
- संपार्श्‍वविक प्रतिभूति के रूप में रखी एफडीआर पर आदेश लागू नहीं हैं किन्‍तु मूल प्रतिभूति के रूप में रखी एफडीआर के अप्रयुक्‍त भाग पर लागू होगा।
आदेश अवयस्‍क के खाते पर लागू नहीं होगा।
गारनिशी आदेश का अनुपालन न करने पर, न्‍यायालय बैंक (गारनिशी) पर आदेश जारी कर सकता है जो कि बैंक के विरूद्द न्‍यायालय द्वारा जारी कुर्की के समान होगा।

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