Saturday, 7 February 2015

डीडी जारी एवं भुगतान हेतु डीडीआर प्रणाली

प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यलयों में डीडी कारबार को केन्द्रीकृत करने हेतु इस प्रणाली को लागू किया गया है जिससे उचित नियंत्रण हो और कपट में भी कमी लाई जा सके। इसके साथ ही इससे ड्राफ्ट राशि के रिकंशिलियेशन भी तेजी से हो जाती है।

डीडीआर -1 रजिस्टर सह डीमाण्ड ड्राफ्ट जारी सूची
डीडीआर -2 रजिस्टर सह डीमाण्ड ड्राफ्ट भुगतान सूची
डीडीआर 1ए-  रजिस्टर सह ड्राफ्ट खाते में क्रेडिट समायोजित प्रविष्टियां
डीडीआर 2ए-  रजिस्टर सह ड्राफ्ट निरस्त एवं डेबिट समायोजित प्रविष्टियां
डीडीआर 4 ड्राफ्ट खाते का विवरण
परिचालनगत दिशानिदेश :
डीडीआर -1 रजिस्टर सह डीमाण्ड ड्राफ्ट जारी सूची
डीडी आवेदन फार्म (बी-17) को भरकर आवेदक इसे संबंधित व्यक्ति (एशिसटेंट) के पास जमा करेगा।जो इसकी जांच करेगा।प्रभारी अधिकारी
बी-17 को या तो कैश विभाग या जमा विभाग (सी सी खाते इसमें शामिल हैं)को देगा और वहां से नकद  प्राप्त करने/या खाता नामे होने  के उपरांत उसे संबंधित एशिसटेंट के पास आएगा जिसको संबंधित डिनोमिनेशन का ड्राफ्ट पन्ना दिया जाएगा। संबंधित एशिसटेंट संपूर्ण विवरण डूप्लिकेट में डीडी जारी ररजिस्टर में दर्ज करेगा(डीडीआर -1 )।ड्राफ्ट बनाते समय संबंधित डिजिट कैज में छेद करना आवश्यक हो जाता है क्योंकि यहाँ सुरक्षा की दृष्टि से अत्यावश्यक हो जाता है। शाखा अपने शाखा नाम और पहचान संख्या की एक स्टैम्प उचित स्थान पर लगाए यदि वह पूर्व छापा हुआ न होतो।
ड्राफ्ट तैयार करने के उपरांत इसे डीडी जारी रजिस्टर में दर्ज करें(शाखावार)।प्रत्येक शाखा हेतु भिन्न पन्ना निर्धारित की जाए।प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल उपरांत नया क्रम संख्या प्रदान किया जाता है और वह आगामी वर्ष के 31 मार्च तक चलता रहता है।यदि ड्राफ्ट राशि 10000/-रू या उससे अधिक होगी तो बी12 में एडवाइस तैयार किया जाएगा । पर इससे कम मूल्य की स्थिति में बी-12 बनाने की आवश्यकता नही है। एडवाइस को उसी दिन अदाकर्ता शाखा को प्रेषित करना होगा। कारबर की समाप्ति में प्रत्येक दिन डीडीआर-1 के राशि कॉलम का जोड़ लगाया जाएगा और आंकड़े को कैश बुक के क्रेडिट साएड में ड्राफ्ट खाता में लिखा जाएगा। कुल नकद / ट्रांस्फर को जीएल के क्रेडिट ओर दर्ज किया जाएगा । इसके लिए कोई अलग से वाउचर बनाने की आवश्यकता नही है।                             
किसी निर्धारित दिन का डीडीआर-1 का मूल पृष्ठ कवरिंग समरी के साथ संलग्न कर मेल कर दिया जाएगा।इस तरह प्रत्येक दिन डीडीआर-1 में प्रविष्टियां नए पृष्ठ से ही प्रारंभ होगी । अधिकारी जो ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करते हैं वे यहाँ सुनिश्चित करें कि वह सही तैयार किया गया है।हस्ताक्षर करनेवाले अधिकारी अपने हस्ताक्षर के नीचे अपने पीएफ मं. एवं नाम का एक रबड़ स्टैम्प अवश्य लगाएं।इस तरह की सावधानी बी-12 ड्राफ्ट एडवाइस में बी ली जाए।
विदेशी शाखएं जारी डीमाण्ड ड्राफ्ट आइबीसीएन भुगतान खाते के माध्यम से ही जाएगा। उन केन्द्रों में जहां हमारे बैंक की सेवाएं हैं ड्राफ्ट उनपर ही आहरित होंगी। पर यदि आवेदक किसी निर्धारित शाखा पर ही ड्राफ्ट का भुगतान नकद में प्राप्त करना चाहता है या उसका किसी निर्धारित शाखा में खाता है तो उसे वह सुविधा प्रदान की जाएगी।

डीमाण्ड ड्राफ्ट का भुगतान
डीडीआर -2 रजिस्टर सह डीमाण्ड ड्राफ्ट भुगतान सूची
सभी शाखाएं डी डी भुगतान रजिस्टर के समरूप एक रजिस्टर तैयार करें जिसमें गुम हुए,चोरी गए ,कपटपूर्वक जारी,डुप्लीकेट जारी इत्यादि ड्राफ्ट का रिकार्ड रखा जाएगा।
(1) भुगतान हेतु प्राप्त ड्राफ्ट की जांच की जाएगी जिसमें उपरोक्त रजिस्टर के माध्यम से यहाँ देख लिया जाएगा कि वह ड्राफ्ट योग्य है या नहीं। अधिकारियों के हस्ताक्षर रिकार्ड हस्ताक्षर से सत्यापित कर लिए जाएंगे।ड्राफ्ट क्रम संख्या डी डी भुगतान रजिस्टर से जांच लिए जाएंगे साथ ही जारीकर्ता शाखा कूट एवं नाम ,जारी दिनांक और राशि जांच ली जाएगी।इसके पश्चात इसे संबंधित सहायक को डीमांड ड्राफ्ट भुगतान रजिस्टर में रिकार्ड करने हेतु गिया जाएगा।
ड्राफ्ट को डीडी पेयबल रजिस्टर में दर्ज करना होगा जिससे यह ज्ञात होगा कि कोई विनिर्दिष्ट /निर्धारित ड्राफ्ट का भुगतान हुआ है या नहीं। इससे जारीकर्ता संख्या के सीरियल नंबर की भी जांच की जा  सकेगी। 50000/-रुपये एवं उससे अधिक के डीमांड ड्राफ्ट का भुगतान हिताधिकारी के खाते के माध्यम से ही होगा। इसका नकद भुगतान नहीं होगा। भुगतान हेतु ड्राफ्ट लिखत को ही डेबिट वाउचर माना जाएगा। इसका नकद भुगतान किया जा सकता है अन्यथा पेइनस्लिप के माध्यम से इसे खाते में जमा किया जाएगा अर्थात यह वाउचर क्रेडिट वाउचर माना जाएगा। फिर इसे संबंधित विभाग को भेज दिया जाएगा। (यथा जमा/बिल इत्यादि विभाग) 10,000/-रू.एवं उससे अधिक के डीमांड ड्राफ्ट के भुतान में सावधानी बरतनी होगी क्योंकि जारीकर्ता शाखा से एडवाइस (बी 12) प्राप्त होने से पहले ही वे भुगतान हेतु प्रस्तुत कर दिए जाते हैं।  मूल डीडी पेड रजिस्ट (डीडीआर-2)(टीयर ऑफ सीट) पृष्ठ को समरी रिपोर्टिंग के साथ मेल करना होगा और कार्बनकापी शाखा के रिकार्ड स्वरूप होगा। प्रत्येक दिन डीडीआर-2 में प्रविष्ट नए पृष्ठ से प्रारंभ होगी। कारोबार के अंत में प्रत्येक दिन भुगतान रजिस्टर का कैश/क्लीरिंग/ट्रांस्फर कॉलम के राशियों को जोड़ा जाएगा और इन आंकड़ो को कैश बुक के ड्राफ्ट खाता जो डेबिट सइड में होता है में दर्ज किया जाएगा। ड्राफ्ट खाते और एक्सचेज और कमीशन हेतु अलग से वाउचर बनाने की आवश्यकता नहीं है। डीडीआर-1 और डीडीआर-2 ड्राफ्ट खाते के स्पलीमेंटरी का काम करेंग। कैश बुक में ड्राफ्ट खाते में वाउचर संख्या दर्शाते समय इसे बी-17 में दर्शाया जाए। इस तरह एक्सचेंज और कमीशन के सामने शून्य दर्शाएं।

यदि बी-12 ड्राफ्ट भुगतान के पहले प्राप्त हो तो इसे डीडी पेड रजिस्टर के संबंधित पृष्ठ पर पिन कर रख दिया जएगा और डीडी के भुगतान पर बी-12 को निकाल दिया जाएगा और इसे डीडी के साथ सिलाई कर वाउचर के साथ रख दिया जाएगा।

डीडीआर-1 - रजिस्टर सह ड्राफ्ट खाते में क्रेडिट एडजस्टमेंट प्रविष्टियों की सूची
इसका उपयोग जिन ड्राफ्ट का भुगतान गलती से ड्राफ्ट खाते के माध्यम से होता है के रिवर्सल के लिए किया जाता है
डीडी पेड के राशि को सुधारना, गलती से अधिक राशि का भुगतान किया गया 
डीडी पेड के राशि को सुधारना,गलती से कम राशि का भुगतान किया गया

डीडीआर-2 - रजिस्टर सह निरस्त डीमांड ड्राफ्ट और डेबिट समायोजन सूची
जारी डीडी को निरस्त किए जाने पर (पूर्ण रिसर्वल ) : इस रजिस्टर का उपयोग होता है
इसमें पूर्व जारी डीडी राशि को ठीक किया जाता है, हो सकता है अधिक राशि गलती से रिपोर्ट की गई हो (कमीशन इत्यादि को जोड़े जाने के कारण)
नोट - पूर्व में डीडी पेड से भुगतान किए गए राशि को बढ़ाने जिसमें गलती से कम राशि की रिपोर्टिंग हुई है, समायोजन प्रविष्टि के लिए डीडीआर-2 में इसे दर्शाना होगा कि डीडीआर-2 में।

रिर्पोटिंग ‌प्रक्रिया
डीडीआर -4 : ड्राफ्ट खाते का विवरण
दिनांत कारोबार की समाप्ति पर जारी डीडी एवं डीडी भुगतान रजिस्टर के कुलयोग को ड्राफ्ट खाते के संबंधित समरी कॉलम में भरा जाए। यानि कि डीडीआर-4 इस तरह यदि डीडीआर- 1 एवं डीडीआर-2 में कोई एडजस्टमेंट किया गया हो तो उसे डीडीआर-4 के संबंधित कॉलम में दर्ज किया जाएगा।

पूर्ण कार्य दिवस का क्लोजिंग बैलेंस को ओपनिंग बैलेंस के रूप में माना जाएगा। दिन के अंत में क्लोजिंग बैलेंस प्राप्त करने हेतु उस दिन के कुल डेबिट (नामे) (डीडीआर-2 एवं डीडीआर-2 हेतु अलग अलग) एवं क्रेडिट (जमा) (डीडीआर- 1एवं डीडीआर- 1 हेतु अलग अलग) को खाते में लेना होगा और इसे यथा क्रमानुसार ओपनिंग बैलेंस में जोड़ एवं घटाव करना होगा।
डीडीआर- 4 के रूप में एक सर्टिफिकेट जो यह सत्यापित करेगा कि डीडीआर- 1,2,1,2 और 4 का पूर्ण रूपेण जांच की गई है उसमें कोई त्रुटि नहीं है उसमें दिनांक 1.10.1997 से पूर्व की कोई प्रविष्टि नहीं है, विदेश स्थित केंद्रों द्वारा जारी डीडी या अन्य डमी प्रविष्टियां, ओपनिंग बैलेंस विगत दिवस के डीडीआर- 4 के क्लोजिंग बैलेंस से मिलान किया गया है और जीएलबी के अनुसार ड्राफ्ट खाते और क्लोजिंग बैलेंस का मिलान किया गया है। जिसमें सहा. प्रबंधक और विभाग के प्रभारी अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किया जाना है। क्वरिंग समरी और उसके संलग्नक (डीडीआर- 1, 1,2, 2ए) आदि को क्षेत्रीय कार्यालय के डीडीआर सेल में पाक्षिक आधार पर तुरंत अलग लिफाफे में भरकर भेजना होगा।
इसके लिए अलग से डेसपेच रजिस्टर बनाया जाए ताकि उचित मानीटरिंग की जा सके।
कंप्यूटरीकृत शाखा कंप्यूटर द्वारा फाइलों को फ्लोपी डिस्क के माध्यम से पाक्षिम रूप से इसे भिजवाएगा।

डीडीआर श्येड्यूल तैयार करना
इसे स्पष्ट रूप से लिखा जाए। इसमें डीडी संबंधी सूचनाएं सही रूप से रिपोर्टिंग की जाए।


डीडीआर- 4 भी निश्चित रूप से ऊपर वर्णित तरीके से दो अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित होने चाहिए।  रिवेलीडेट के मामले में वास्तविक तारीख दर्ज की जाए कि रिवेलीडेट की तारीख को दर्ज करें। विदेशी केंद्रों और एजेंसी अरेंजमेंट के तहत भुगतान किए गए ड्राफ्ट की रिपोर्टिंग इस प्रणाली में नहीं की जा सकती है।

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