शिक्षा ऋण
का आरंभ 1981 में वेपा कामेसम समिति की सिफारिश के अनुसार किया गया था। इस योजना
में समय-समय पर कई संशोधन किए गए । हाल ही में, आईबीए ने वित्त मंत्रालय के
निर्देश के अनुसार शिक्षा ऋण की आदर्श योजना तैयार किया है । भारतीय बैंकर्स संघ द्वारा
बनाई गई और विकसित की गई शिक्षा ऋण योजना को हमारे प्रधान कार्यालय ने अपनाया है ।
यह ऋण योजना इस संबंध में पहले सभी अनुदेशों को खारिज करती है और इस योजना का
विवरण इस प्रकार है
-
योजना का उद्देश्य और विस्तार
:
योग्य छात्र वित्तीय
सहायता के अभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए ।
दो प्रमुख योजनाएं हैं। 1) भारत में अध्ययन 2) विदेशों में अध्ययन
I. निम्नलिखित के
लिए भारत में अध्ययन-
1)
स्नातक पाठ्यक्रम जैसे बी.ए, बी.एस.सी, और बी.कॉम आदि
2) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम जैसे एम.ए, एम.एस सी
और एम.कॉम आदि
3)
पीएच.डी.पाठ्यक्रम
4) व्यावसायिक
पाठ्यक्रम जैसे – इंजीनियरी, मेडिकल, कृषि, पशुचिकित्सा, विधि, दंत चिकित्सा, प्रबंधन, कंप्यूटर, आइ सी डब्लयू ए, सी.ए,
सीएफए आदि
5) यूजीसी/सरकार/एआईसीटीई/एआईबीएमएस/आइसीएमआर
आदि द्वारा अनुमोदित कॉलेजो/ विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित डिप्लोमा/डिग्री के
अन्य पाठ्यक्रम आदि
6) इलेक्ट्रॉनिक विभाग या कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों
द्वारा अंगीभूत प्रतिष्ठित संस्थानों से कंप्यूटर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
7) आईआईएम, आईआईटी, आईआईएससी, एक्सएलआरआई,
एनआइएफटी आदि द्वारा आयोजित पाठ्यक्रम
8) प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा
भारत में प्रस्तावित पाठ्यक्रम
9) अनुमोदित संस्थानों द्वारा आयोजित सायंकालीन
पाठ्यक्रम
10) राष्ट्रीय संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठित
निजी संस्थानों द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रम
II. विदेशों में अध्ययन
1) स्नातक – प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों
द्वारा संचालित रोजगार उन्मुखी व्यवसायिक/तकनीकी
पाठ्यक्रम
2) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम जैसे एमसीए, एमबीए,
एमएस आदि
3) प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोध
कार्य/व्यवसायिक पाठ्यक्रम
4) सीआईएमए – लंडन, यूएसए में सीपीए द्वारा
संचालित पाठ्यक्रम
उधारकर्ता की पात्रता
1) छात्र भारतीय नागरिक होना
चाहिए ।
2) प्रवेश परीक्षा/मेरिट
आधारित चयन प्रक्रिया के द्वारा भारत में व्यवसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया हो
3) प्रवेश परीक्षा/मेरिट
आधारित चयन प्रक्रिया के द्वारा विदेशी विश्वविद्यालयों/संस्थानों में दाखिला
लिया हो
आयु-सीमा :
व्यवसायिक प्रशिक्षण
पाठ्यक्रम और रोजगार उन्मुखी डिप्लोमा और स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए उम्र 18 से
25 वर्ष के बीच होनी चाहिए ।
यदि छात्र की उम्र 18 वर्ष
से कम है तो सक्षम प्राधिकारी उम्र सीमा में छूट दे सकते हैं । ऋण मंजूर करने वाले
प्राधिकारी सामान्य श्रेणी के छात्रों के मामले में उपरी आयु सीमा 28 वर्ष और अ.जा./अ.ज.जा.
के उम्मीदवारों के मामले में 30 वर्ष तक छूट दे सकते हैं । स्नातकोत्तर और शोध
कार्य के लिए आयु सीमा 21 वर्ष से 28 वर्ष होनी चाहिए । ऋण मंजूर करने वाले
प्राधिकारी अपने विवेक से उपर आयु सीमा में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के
लिए 30 वर्ष और अजा/अजजा के लिए 33 वर्ष तक छूट दे सकते हैं । सभी मामलों में
अभिभावक अर्थात् माता-पिता सह-उधारकर्ता होंगे ।
योजना के अंतर्गत व्यय के लिए पात्रता:-
1) पाठ्यक्रम शुल्क
2) छात्रावास/बोर्डिंग शुल्क
3) पुस्तकों की कीमत और अध्ययन के लिए आवश्यक
जर्नल
4) पाठ्यक्रमों के लिए अपेक्षित स्टेशनरी और
उपकरण
5) परीक्षा शुल्क/पुस्तकालय/प्रयोगशाला शुल्क
6) सुरक्षा जमा/बिल्डिंग फंड/यूनिफॉर्म आदि
7) यदि पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक हो तो कंप्यूटर
की खरीद (जो बैंक के प्रति दृष्टिबंधक होगा)
8) पाठ्यक्रम पूरा करने हेतु अपेक्षित कोई अन्य
खर्च जैंसे – स्टडी टूर,
परियोजना कार्य, शोध-प्रबंध आदि
9) विदेशों में अध्ययन के मामले में उपरोक्त
के साथ वायु टिकट
वित्तीयन की प्रमात्रा :-
आवश्यकता आधारित यह वित्त
अभिभावकों/छात्रों की चुकौती क्षमता के आधार पर इस प्रकार होगा;
भारत में अध्ययन हेतु अधिकतम रु.10 लाख
विदेशों में अध्ययन हेतु अधिकतम रु.20 लाख
(विनिमय नियंत्रण विनियमों के अनुपालन के अधीन)
संवितरण और अन्य महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश :
- परिवार/अभिभावकों
की आय के लिए कोई सीलिंग नहीं है ।
- शिक्षा
ऋण का कोई भी आवेदन अगले उच्चतर प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना अस्वीकार
नहीं किया जाएगा ।
- स्टाफ
संबंधी मामलों में ऋण, मंजूरी देने वाले प्राधिकारी से एक श्रेणी उपर के
प्राधिकारी द्वारा मंजूर किया जाएगा ।
- इस आशय की घोषणा/शपथपत्र लिया
जाएगा कि अन्य बैंकों से कोई ऋण नहीं लिया गया है।
- ऋण एप्रेजल के दौरान छात्र
द्वारा भविष्य में आय की संभावना पर
विचार किया जाना चाहिए । यदि आवश्यक
होतो अभिभावक/माता-पिता की संपत्ति/आय को भी चुकौती क्षमता को निर्धारित करने
के लिए देखा जा सकता है ।
- संपूर्ण वित्त
प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र अग्रिम के रूप में होगा ।
- अं.प्र., रु.4 लाख तक के ऋणों
के लिए किसी भी नियम में छूट दे सकते हैं ।
- म.प्र. रु.4 लाख से अधिक के
ऋणों के लिए किसी भी नियम में छूट दे सकते हैं ।
- शिक्षा ऋणों के लिए कोई भी
प्रोसेसिंग और अप फ्रंट शुल्क नहीं लिया जाएगा ।
- छात्र के प्रगति रिपोर्ट के
संबंध में नियमित अंतराल पर शाखा, शैक्षिक संस्धानों से संपर्क करेगी।
- उस शाखा की प्राथमिकता दी
जाएगी, जो उधारकर्ता के निवास से नजदीक हो ।
- ऋण का संवितरण आवश्कता/मांग
के अनुसार चरणों में यधासंभव सीधे संस्थानों/पुस्तकों/ उपकरणों/उपष्करों के
विक्रेताओं को किया जाएगा ।
चुकौती
अवधि -
- पाठ्यक्रम अवधि + एक वर्ष या नौकरी प्राप्त करने के 6 महीने, जो भी पहले हो, से चुर्काती
आरंभ की जाएगा ।
- ऋण मोरोटोरियम के बाद 5-7
वर्षों में चुकायी जाएगी ।
- यदि छात्र निर्धारित समय में
पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर सकता तो पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिकतम 2 वर्षों
का समय और दिया जा सकता है ।
- यदि छात्र इसके बावजूद भी
पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम नहीं हो और कारण उसके नियंत्रण में नहीं हों
तो मंजूरी देने वाले प्राधिकारी अपने विवेक से चाहें तो पाठ्यक्रम पूरा करने
के लिए यथाआवश्यक अवधि का विस्तार दे सकते हैं ।
- मोराटोरियम अवधि में उपचित ब्याज,
मूलधन और तय किए जाने वाले ई एम आई में जोड़ दिया जाएगा ।
\ब्याज – दर
·
रु.4 लाख सहित तक की सीमा – बीपीएलआर – 1.0% ।
= 11=25%
(10.07.09 से प्रभावी)
·
रु.4 लाख से अधिक की समा - बीपीएलआर – 0.5%=
11.75%
·
डी आर आई मानदंड पूरा करने वाले /
विकलांग छात्र - 4%
·
मोराटोरियम अवधि/चुकौती अवकरश के
दौरान ब्याज तिमाही/अर्धवार्षिक रूप में सामान्य आधार पर डेबिट किया जाएगा ।
·
केवल रु.4 लाख से अधिक की सीमा के
लिए ओवरड्यू अवधि के लिए आवेरड्यू राशि पर 2% प्रति वर्ष की दर
से दांडिक ब्याज लगेगा ।
ऋण राशि का आंकलन
ऋण की राशि का आंकलन करते
समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए –
ए) भावी
रोजगार की संभावना
बी)
संभावित वास्तविक आय
सी) कुल
अवधि के लिए ब्याज की राशि
डी)
मोराटोरियम अवधि के दौरान यदि ब्याज शुरू से नहीं दिया जाए तो यह भार प्रधिक हो
जाएगा । अतएवं, चुकौती की समय, अवधि चुकौती क्षमता का अभिनिश्चय करके ही शुरू
करना चाहिए ।
शक्तियों का
प्रत्यायोजन
: (दिनांक 12.09.07 से प्रभावी)
स्केल – I स्केल –
II स्केल – III
ऋण की राशि (लाख में) 4.0 7.5 7.5
मार्जिन :
·
रु.4 लाख तक – कोई मार्जिन नहीं
·
रु.4 लाख से अधिक – भारत में अध्ययन हेतु 5% और विदेशों के लिए 15%
·
स्कॉलरशिप/सहायता मार्जिन में
शामिल किया जाएगा ।
·
संवितरण के समय वार्षिक आधार पर
मार्जिन तय किया जाएगा ।
जमानत
·
रु.4 लाख तक के लिए – कोई जमानत नहीं
·
रु.4 लाख से अधिक और रु.10 लाख तक
के लिए -
·
संतोषजनक तृतीय पक्ष गारंटी
·
ऋण के 100% के बराबर संपाशिर्वक जमानत या ऋण के 100% के लिए
अभिभावकों/माता-पिता/तृतीय पक्ष का सह-दायित्व । तृतीय पक्ष गारंटी से छूट दी जा
सकती है यदि माता-पिता का नेटवर्थ/संपत्ति संतोषजनक है । इस स्थिति में माता-पिता
संयुक्त उधारकर्ता होंगे ।
·
जमानत भूमि/भवन, तरल लिखतों,
एलआईसी, स्वर्ण, शेयर, बैंक जमा आदि के रूप में हो सकता है ।
दस्तावेजीकरण :
i) निर्धारित फॉर्मेट
- ए 48 (संशोधित-भाग-1) में आवेदन पत्र
ii) फॉर्मेट - ए 48 (संशोधित - भाग
2) में अध्ययन के दौरान उपचित ब्याज और रोजगार प्राप्ति के बाद संभावित वेतन को
शामिल करते हुए व्यवहार्यता आकलन विस्तार से किया जाना चाहिए।
iii) ए 49 बी की अनुसार बैंक और उधारकर्ता तथा गारंटर के बीच एक करार किया जाना
चाहिए, जो करार के रूप में विधिवत् मुद्रांकित होना चाहिए ।
iv) गारंटर की संपत्ति की विवरणी और
पीएस वी आर -1 और पीएस वी आर-2 रिपोर्ट 1 संपत्ति के मार्टगेज की स्थिति में, पी
एस वी आर-4 तथा पीडी आई आर सहित ऐसे मामलों पर लागू सभी कागजात तैयार और प्राप्त
किया जाना चाहिए ।
सक्षमता प्रमाणपत्र :
मंजूर करने
वाले प्राधिकारी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा रहे छात्रों को सक्षमता प्रमाणपत्र
भी जारी कर सकते हैं । इसके लिए, यदि आवश्यक हो तो आवेदक से वित्तीय और अन्य
समर्थक दस्तावेजों को मांगा जा सकता है । कुछ विदेशी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा
के लिए विदेश जाने वाले छात्रों के बैंकरों से यह प्रमाणपत्र मांगते हैं ताकि वे
सुनिश्चित कर सकें कि छात्र अध्ययन पूरा करने तक व्यय करने में सक्षम हैं ।