Saturday, 7 February 2015

नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर (ईएफटी) और रीयल टाइम ग्रास सेटेलमेंट

यह प्रणाली भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रांरभ की गई है जिससे पूर्व सुरक्षित त्वरित आर्थिक दृष्टि से कम लागत पर विश्वसनीय और अति उत्तम सेवा के रूप में निधि अंतरण किया जा सके।


भारत में बैंकिंग क्षेत्र में फण्ड ट्रांसफर और किल्यरिंग हेतु यह एक अभूतपूर्व प्रणाली मानी जा रही है इस प्रक्रिया के तहत एक दिन के अंदर निधि का अंतरण सफलतापूर्वक एकस्थान/केन्द्र से दूसरे स्थान/केन्द्र किया जा सकता है।
प्रश्न-1. आरटीजीएस प्रणाली क्या है ?
उत्तर-    इसका मतलब हुआ रियल टाइम ग्रास सेटेलमेंट जिसमें निधि का अंतरण एक बैक से      अन्य बैंक के उसी समय (रियलटाइम) और पूर्ण रुपसे (ग्रास) जमा किया जा सकता है।   निधि अंतरण का यह बैंकिंग चैनल में सबसे तीव्रतम प्रणाली है रियल टाइम का अर्थ हुआ इसके भुगतान प्राप्त करने हेतु किसी प्रकार का कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता           है।
      जैसे इसकी प्रोसेसिंग पूरी होगी इसे खाते में जमा कर दिया जाता है इसे बिना      किसी    अन्य प्रकार के लेनदेन से मिलाए अलग-अलग एकल आधार पर इसका सेटेलमेंट किया    जाता है। यह माना जाता है कि निधि का अंतरण रिजर्व बैंक ऑफ इंण्डिया के बुक     में ही     होता है यह भुगतान अंतिम ओर इरिवोकेबल होता है।)

प्र-2.     आरटीजीएस यह ईएफटी या एन एफटी से किस तरह भिन्न है?
उत्तर-    ईएफटी या इनईएफटी ये इलेक्टॉनिक निधि अंतरण के माध्यम है जो कि डेफर्ड नेट         सेटेलेंमट (डीएनएस) आधार पर परिचालित होती है। जोकि बेच में लेनदेन को सेटेल   करती है। डीएनएस में निर्धारित समय पर ही सेटेलमेंट किया जाता है। और तबतक             सभी लेनदेन को रोके रखा जाता है। उदा: के तौर पर एन एफटी यह सप्ताह के   5         दिन 6  बार होती है और शनिवार को 3 बार। इस तरह कोई भी लेनदेन उस निर्धारित             समय के दौरान ही की जाती है जबकि आरटीजीएस में प्रत्येक लेनदेन प्रक्रिया लगातार            जारी रहती है अर्थात इसके लिए कोई वेटिंग पिरियड नहीं होता।

प्र-3.     आरटीजीएस लेनदेन में क्या राशि प्रेषित करने  की कोई न्यूनतम/अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है।
उत्तर-    यह उच्च मूल्य के लेनदेन हेतु काम में लाई जाती है। जिसमें न्यूनतम राशि 1 लाख         रु. है पर कोई उच्चतम सीमा इसमें निर्धारित नहीं है। पर ईएफटी या एनईएफटी         लेनदेन             में किसी प्रकार की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

प्र-4.     आरटीजीएस के अंतर्गत एक खाते से दूसरे में निधि अंतरण हेतु निर्धारित समयसीमा किया है ?
उत्तर-    सामान्य परिस्थितियों में यह अपेक्षा की जाती है कि जैसे ही निधि प्रेषण करनेवाली शाखा           निधि को भेजती है बिना समय लगे वह हिताधिकारी शाखा को प्राप्त हो जाए यह ध्यान देना है कि हिताधिकारी के खातो में निधि अंतरण सूचना के दो घण्टे के अंदर ही    जमा कर दिया जाए।

प्र-.       क्या जो व्यक्ति निधि प्रेषित करे  उसे लाभार्थि के खाते निधि जमा होने पर कोई पावती प्राप्त होती है।
उत्तर-    धन प्रेषक बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक से यह सूचना प्राप्त  होती है कि धन प्राप्ति बैंक के खाते में निधि जमा हो गई है। इसके आधार पर धन प्रेषक शाखा अपने ग्राहक को         सूचना दे सकती है।

प्र-        हिताधिकारी के खाते में यदि राशि जमा हो सका हो तो क्या निधि प्रेषक ग्राहक को राशि वापस मिल जाती है और इसमें कितना समय लगता है.
उत्तर-    यह आशा की जाती है कि धन प्राप्ति बैंक हिताधिकारी के खाते में तुरंत राशि को जमा       कर दे। यदि किसी कारण वश बह जमा करने  में असमर्थ होता है तो वह उसे 2 घंटे            के अन्दर वापस भेज देगा जैसे ही राशि निधि प्रेषक बैंक को प्राप्त हो जाए वह उसे      ग्राहक के खाते में डाल देगा।

प्र.-       आरटीजीएस सेवा कब तक उपलब्ध होती है?
उत्तर-    ग्राहको हेतु आरटीजीएस की सुविधा 9 बजे से लेकर 16.30 बजे तक सप्ताह के प्रथम पांच दिन और शनिवार को यह 9 बजे से 12.30 बजे तक उपलब्ध होती है साथ ही वह उस बैंक की शाखा के ग्राहक लेनदेन के समय पर भी निर्भर होगी।

प्र.-8     आरटीजीएस लेनदेन में कोई सेवा प्रभार/प्रसंस्करण प्रभार देय है?
उत्तर-    बैंकों द्वारा विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को उपलब्ध करवाने के दौरान यह ध्यान रखा     गया है कि सेवा प्रभार में कमी लाई जाए जो कि निम्नानुसार हैं
            क) आवक लेनदेन- मुफ्त, कोई प्रभार नहीं
            ख) जावक लेनदेन-      
                        1 लाख रु. से 5 लाख रु. तक - 28/- रु. प्राप्त लेनदेन
                        5 लाख रु. से अधिक          - 55/- रु. प्रति लेनदेन

प्र.-9     धन प्रेषित करने हेतु वे कौन सी आवश्यक जानकारियां है जिसे ग्राहक को बैंक को अवगत करवाना आवश्यक होता है.
उत्तर-    ग्राहक  को निम्न जानकारियाँ  देनी आवश्यक है
  1. कितनी राशि प्रेषित करनी  है
  2. खाता संख्या जिसे डेबिट करना है
  3. हिताधिकारी बैंक का नाम
  4. हिताधिकारी ग्राहक का खाता संख्या वं नाम
  5. यदि उसे प्रतिसूचना आवश्यक है तो सूचित करे
  6. निधि प्राप्ति शाखा की आइ एफ एस सी संख्या



प्र.10-   कोई ग्राहक किसी अन्य शाखा के आइएफएससी कोड को कैसे जान सकता है?
उत्तर-    ग्राहक जिस शाखा को निधि प्रेषित करना चाहता है उससे वह यह कोड प्राप्त कर   सकता है यह कोड चेक पन्ने पर भी उपलबध होता है। जिसे हिताधिकारी धनप्रेषित करने वाले          ग्राहक को भी भेज सकता है।

प्र.11-   क्या भारत की सभी बैंकों की शाखाओं में आरटीजीएस सेवा उपलबध है ?
उत्तर-    नहीं  भारत की सभी बैकों की शाखाओं में आरटीजीएस सुविधा उपलब्ध्य नहीं है।  31दिसंबर, 2008 तक 52000 बैंक  शाखाओं में आरटीजीएस सुविधा उपलब्ध है       यह सूची भारतीय रिजर्व बैंक के वेवसाइट में उपलब्ध है।

प्र.12-   क्या किसी तरह धन प्रेषित करने वाला ग्राहक अपने प्रेषित लेनदेन का ट्रेक रख सकता    है?
उत्तर-    यह धन प्रेषित करनेवाले ग्राहक और धन प्रेषित बैंक के बीच हुए अरेंजेमेंट पर निर्भर     करता है। इन्टरनेट बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करनेवाली कुछ बैंक यह सेवा प्रदान करती         है। एक बार जैसे ही हिताधिकारी बैंक के खाते में निधि क्रेडिट हो जाए वह धनप्रेषित    ग्राहक को ईमेल या मोबाइल पर एसएमएस द्वारा इसकी सूचना दे देती है।

प्र.13- सामान्य दिनों में आटीजीएस के माध्यम से कितने मूल्य और कितनी राशि का लेनदेन होता है?
उत्तर-    आरटीजीएस के माध्यम से आम तौर पर 60,000 लेनदेन प्रतिदिन हो जाता है और जिससे लगभग 2700 बिलियन रुपये शामिल होते है।

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