Sunday, 22 February 2015

लिमिट बनाने के लिए जाब कार्ड

HLNM – इस मेनु से लिमिट नोड बनाया जाता है तथा लिमिट बनाई जाती है। मुख्‍य मेनू से HLNM Enter दबाएं
Tab से Add चुने, Limit ID में  SL लिखे और लिमिट उपकोड को नीचे दिखाएं पेड़ में से चुने और Accept दबाएं।

अगली स्‍क्रीन में  DESC में प्रतिभूति का विवरण जैसे जमा रसीद  CCY  को INR, स्‍वीकृत लिमिट शक्तियों की अन्‍तर्गत-4 विकल्‍प मिलेंगे। स्‍वीकृत शर्तों के अनुसार चुने। ग्राहक की  ID भरें। लाल चिह्न *  के अन्‍तर्गत दिखाएं गए फील्‍ड अवश्‍य भरे जाए। अतिरिक्‍त विवरण Note  कालम में दिए जा सकते है। Submit बटन दबाए। Added Successfully संदेश दिखाई देगा।
लिमिट नोड का सत्‍यापन
HLNM  मेनू के माध्‍यम से अन्‍य यूसर (अकधकारी) द्वारा किया जाए

संपार्श्विक प्रतिभूतियों को जोडना
HCLM खाते में प्रतिभूति को जोड़ने या लिमिट नोड के लिए

मुख्‍य मेनू से टाइप करे HCLM  तथा enter दबाएं।
स्‍क्रीन में नीचे आरहे क्रम में L-Lodege को चुने।
लिंकेज टाइप में चुने कि खाता है या लिमिट नोड। यदि खाता है तब खाता संख्‍या दे या यदि लिमिट है जब लिमिट ID का विवरण दे। पिर TYPE बटन पर क्लिक करे एक नीचे आती सारणी दिखेगी जिसमें से प्रतिभूति का प्रकार चुने और accept बटन दबाएं।
Tab करते हुए सभी सामान्‍य विवरण भरें फिर Particular tab, प्राप्ति और भुगतान टैब, शुल्‍क टैब इत्‍यादि प्रतिभूति के अनुसार भरे और Submit बटन दबाएं।
यदि कोई चेतावनी / अपवाद  / गलतियां दिखाई जाए उनमें सुधार करें यदि जिनको अनदेखा करना हो त‍ब एक्‍सेप्‍ट बटन दबाएं।
संपार्श्विक जोड़े जाने का सत्‍यापन
संपार्श्विक जोड़ने के सत्‍यापन HCLM से करें। Verify विकल्‍प को चुने, खाते का नंबर दें तथा Accept बटन दबाएं।
अगली स्‍क्रीन में हाथ के निशान के साथ दिखाए जा रहे कोलेटरल कोड पर दबाएं तथा सभी स्‍क्रीन पर जाए तथा स‍बमिट बटन दबाएं।
इस क्रिया से संबंधित अन्‍य विकल्‍प


HBKQRY ग्राहक को लिमिट से संबन्धित जानकारी
HACLHI लिमिट नोट की विस्‍तृत जानकारी
LNI लिमिट नोट जानकारी
LNDI लिमिट नोट की विस्‍तृत जानकारी
HACLHM एकाउंट लिमिट हिस्‍ट्री बनाना
ACLHMAU एकाउंट लिमिट अधिकृत करना
LNHTIR लिमिट नोड हिस्‍ट्री बनाना

01/12/2009 को खुली नई ॠण योजना
ॠण योजना यूको शेल्‍टर फर्नीशिंग
स्‍कीम कोड L731C
जीएल उप हेड 47040
ब्‍याज सारणी कोड AUO81 (डिफाल्‍ट फ्लोटिंग)
LZERO (fixed) नियत ब्‍याज दर के साथ जैसा एकाउंट प्रमुख डेबेट् में
INTTM मेनू से जाएं।

संदर्भ - HO/Retail Banking/2009-10/1949, dated 26.11.09

ॠण खातों के लिए जॉब कार्ड

ग्राहक की ID, HCUMM मेनू में जाकर तैयार करें
खाता खोलना मेनू चुने HOAACLA एंटर दबाएं
ग्राहक  ID लिखे या अलग संक्षिप्‍त नाम लिखक चुने। स्‍कीम कोड लिखे जिसके अन्‍तर्गत खाता खोलना है। फिर Accept बटन पर Click  करे। खाता खोलने का मेनू सामने आ जाएगा।
सामान्‍य विवरण खाता खोलने का फार्म / प्रलेखों में दिए गए विवरणों के साथ आवश्‍यक फील्‍ड भरें।

स्‍कीम विवरण ॠण राशि भरें
            - ॠण समयावधि
            - पुनर्दायगी के तरीके
            - चालू खाते में देय राशि को होल्‍ड
- जिस किसी में अनुदान हो उसमें Y या N
- यदि Y है तब अनुदान विवरण जैसे कि अनुदान खाते, अनुदान एजेंसी दावा तिथि, राशि तथा प्राप्‍त अनुदान का विवरण भरे।

ब्‍याज लगाएं
-          राशि ब्‍याज फ्लैग का चुनाव करे
-- ब्‍याज लगने की पुनरावृत्ति चक्रवृद्धि मासिक हो
-- चक्रवृद्धि ब्‍याज माह के अन्‍त पर
-- LA – Intt.पर जाए

फ्लो मानदण्‍ड
किस्‍तों की संख्‍या / किस्‍त शुरूआत तिथि / किस्‍त भुगतान बारम्‍बारता
फ्लो विवरण
स्‍कीम के अनुसार विवरण दिखाए जाएं।
पिर शिड्यूल पर क्लिक करे तथा स्‍क्रीन पर दिखाई किस्‍त राशि को सुनिश्चित करें।
एमाउंट लिमिट स्‍वीकृति की तारीख, समाप्ति की तारीख / प्रलेखों की तारीख / स्‍वीकृति अधिकारी / लेवल लिमिट संदर्भ सं/ आहरण शक्ति भरे।
अतिरिक्‍त विवरण-

उन ग्राहकों के लिए जो विविध लिमिट उपभोग कर रहे है चुने HLNM – विवरण भरें

प्रतिभूति विवरण

प्रतिभूति रजिस्‍टर बनाना ॠण खाते से जुड़ी सभी प्रकार की प्रतिभूतियों को मेनू HCLM से भरें।
एकाउंट लिमिट हिस्‍ट्री भरना -
चुने HACLHM
-          स्‍वीकृत लिमिट का इतिहास / आहरण शक्तियों को बनाया जाए।
-
पूछताछ / रिपोर्ट
LNI लिमिट नोड जांच
LNDI लिमिट नोट विवरण जांच
CLMRPTS प्रतिभूति रजिस्‍टर माड्यूल रिपोर्ट
HLAOPI ॠण अतिदेय जांच
HLARSH-  ॠण अदायगी अनुसूची

अतिरिक्‍त मेनू चुनाव

LAMOD ॠण संवितरण राशि को वापिस करना
HACMLA ॠण खाते में संशोधन
LADGEN मांग बनाना तथा ब्‍याज की गणना
HLASPAY ॠण नियमावली भुगतान
HLAUPAY ॠण बगैर नियमावली भुगतान
CAAC - ॠण खाता बन्‍द करना
HLARA ॠण शिड्यूलिंग
LALIEN ॠण में लियन मार्क करना
HLAGI ॠण मे सामान्‍य पूछताछ

लोन के वाऊचर बनाना और पोस्ट करना

सीबीएस में जब आप काम करें तब हाथ वाउचर को कम करें। जहां कहीं ट्रंजक्शन  किया जाए पूरे विवरण के साथ लिखें और बैंक नियमानुसार एक सा रखें ताकि ये वाउचर सिस्‍टम पास कर सके।
ॠण, वीपी इत्‍यादि खातों में संचालन करने के लिए शाखा को हाथ से ही वाउचर बनाने होंगे। वाउचर का विवरण संक्षिप्‍त रूप में लिए ताकि टीएम में काम करते समय विवरण किया जा सके। यही विवरण ग्राहक को खाते का विवरण देते समय उसे सुविधा देगें। ओर साथ सा‍थ आपको सिस्‍टम में जब चाहे आप भी देखें। ॠण खाते को बन्‍द करने, संवितरण करते समय मेनू यूसर को विवरण देना ही पड़ता है। टीएम मेनू को प्रत्‍येक समय प्रयोग नहीं करना चाहिए क्‍योंकि हरेक तरह के लेनदेन के लिए अलग अलग तरीके है जैसे खाते को बन्‍द करने के लिए विशेष मेनू है जब कि बाद में मामले में विवरण स्‍वत: तैयार हो जाता है।

वाणिज्यिक बैंकों द्वारा कृषि वित्त प्रदान करने के लिए भारिबैं का दिशानिर्देश


सामान्‍य उद्देश्‍य एवं दृष्टिकोण
वाणिज्यिक बैंकों का मुख्‍य उद्देश्‍य कृषि क्षेत्र में वित्‍त प्रदान करके किसानों को नई और उन्‍नत तकनीकी को अपनाकर जीवन स्‍तर में सुधार लाना है। कृषि क्षेत्र में दिया जाने वाला ॠण उद्देश्‍य परक हो ताकि वे आधिक्‍य को बढ़ा सकें।
बैंकों का कृषि क्षेत्र में वित्‍त प्रदान करते समय मुख्‍य उद्देश्‍य उत्‍पादकता बढ़ाने जैसे नए निवेश नए उत्‍पाद के साथ उनकी आय में बढ़ोतरी करे। नए साधनों को लाना मुख्‍य प्राथमिकता होनी चाहिए न कि विद्यमान प्रतिभूति को बदलना।
कृषि क्षेत्र में पारम्‍परिक या विद्यमान रूप में एक साथ नहीं रखी जा सकती। कृषि वित्‍त इस वाणिज्यिक बैंकों द्वारा इस प्रकार प्रदान किए जाएं ताकि खेतिहर लोगों को वाणिज्यिक बैंकों की परिधि में लाया जा सके िफर  उत्‍पादकता बढ़ाते हुए उत्‍तरोत्‍तर आय में बढाना मुख्‍य उद्देश्‍य है।
कृषि क्षेत्र में वित्‍त प्रदान करने में फंड उपलब्‍धता अन्‍य क्षेत्रों की अपेक्षा पर्याप्‍त मात्रा में है। जब अपेक्षित वित्‍त बैंकों से नहीं हो पाता है तब किसान कहीं और से उधार ले रहे हैं और यह माना जाता है कि वे मुख्‍य प्रदाता है और उसे परोपकारी माना जाता है। इससे बैंक और ॠण लेने वाले के बीच स्‍थायी रिश्‍ते प्रभावित होते है।
ॠणी के साथ निरन्‍तर संपर्क बनाए रखें जो ॠणी वसूली के प्रयोजन के लिए, कृषक को शिक्षित करने और उसमें नियमित भुगतान की आदत डालना व्‍यापक उद्देश्‍य होना चाहिए। अब तक बैंकों ने अपनी गतिविधियों को उच्‍च क्षमता की ओर केंद्रित किया है जिससे वे बिचौलिए पर निर्भर हो गए है। भविष्‍य के लिए उन्‍हें और कठिन क्षेत्रों में जाना होगा ताकि पुराने ॠणों की वसूली अभियान और मजबूत होगी।
अभियान का क्षेत्र ओर कर्मचारी
हाल के अनुभव ने दिखा दिया है जब बैंक सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण अपनाते है तब वे बेहतर परिणाम प्राप्‍त कर रहे हैं।  उस क्षेत्र में संसाधनों की समग्र कमी की संभावना से बचने के लिए यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है कि शाखा में कर्मचारियों की उपलब्‍धता के अनुरूप दो या दो दो से अधिक बैंकों द्वारा अविव्‍यापी की संभावना से बचने का प्रयास करे। वित्‍त को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण एवं अर्द्व शहरी शाखाएं पर्यवेक्षण के माध्‍यम से उन्‍मुख उत्‍पादन को प्रा‍थमिकता देने के लए सेवा क्षेत्र नाम के एक निर्धारित क्षेत्र को आवटित करें। शाखाएं उनकी प्राथमिका प्राप्‍त क्षेत्र के अन्‍तर्गत उधार सीमित करें। जब कि अन्‍य शाखाएं जिन्‍हें निर्दिष्‍ट क्षेत्र नहीं दिया गया है वे आमतौर पर 20 किमी की त्रिज्‍या के भीतर वित्‍त कर सकते हैं।
इस क्षेत्र के लिए 450-500 उधारकर्ताओं के लिए एक पर्यवेक्षक के मानदंड को अपनाया जा सकता है। हांलाकि जहां एक से अधिक फसल पद्धति का तरीका है और मौसम फसल को ओवर लैप करते हैं दो सेट स्‍टाफ पर विचार किया जा सकता है। एक प्रस्‍तावों के मूल्‍यांकन के लिए और अन्‍य जांच पड़ताल एवं प्रभावशाली वसूली के लिए। पूर्वोक्‍त दूरी की सीमा केवल एक गैर सेवा क्षेत्र शाखाओं के लिए दिशानिर्देश  है ताकि बैंके जिनके खेत बिखरे हुए है या ॠण कार्यालय से बहुत है जिनकी देखरेख करना मुश्किल और अप्रभावी है उनके लिए इस 20 किमी के प्रतिबन्‍ध के कठोर नियम है।
और यदि खास शाखा यह मानती है कि वे इससे परे कुछ ॠण प्रस्‍तावों की निगरानी कर सकता है वहां रोकने के लिए कुछ ऐसा नहीं है।
तथ्‍यत: जहां एक उचित मात्रा में कापेक्‍ट क्षेत्र से आवेदन प्राप्‍त हो रहे है और प्रक्रिया और निगरानी आसान हो सकती है चाहे वे 20 किमी की परिधि से बाहर हो शाखाओं को ऐसे आवेदन पत्रों को व्‍यवहार्यता के आधार पर स्‍वीकृति दी जा सकती है। उन्‍हें सिर्फ इस वजह से अस्‍वीकार नहीं किया जाना चाहिए कि वे सामान्‍य क्षेत्र से बाहर के है। यदि वे उन्‍हें प्रभावी ढंग से संचार सुविधाओं के द्वारा सेवित कर सकते है तब ये दिशानिर्देश न केवल कृषि अग्रिमों पर लागू होते है बल्कि अन्‍य अग्रिमों के लिए भी लागू होंगे। जहां निर्दिष्‍ट सेवाएं नहीं दिया गया है।
शाखा प्रबन्‍धकों को विवेकाधीन शक्तियों इस प्रकार प्रदत्‍त हैं कि कम से कम 80% प्रस्‍तावों को केन्‍द्रीय कार्यालय के संदर्भ के बिना वित्‍त के पैमाने के अन्‍तर को देखते हुए मंजूरी दी जा सके। इस सम्‍बन्‍ध में एकरूपता के अनुसार कार्य किया जाना चाहिए।
शाखा प्रबन्‍धक को अपने अधिकार क्षेत्र से संबंधित बुनियादी कृषि आंकड़े रखने चाहिए।
क्रेडिट मानक एवं वित्‍त पैमाना
फसलों ॠण वित्‍त पैमाने के अनुसार दिया जाना चाहिए जिसे लीड बैंकों के प्रतिनिधि एवं वाणिज्यिक बैंकों के जिनकी अधिक शाखाएं उस क्षेत्र में होती है। एक प्रतिनिधिक के साथ तकनीकी समिति द्वारा तैयार किया जाता है।
फसल उगाने के लए अल्‍पावधि ॠण साधारणत: नकद एवं घटक प्रकार में विभाजित किया जा सकता है। यह सुनिश्चित किया जाए कि घटक प्रकार वास्‍तविकता ने उठाया गया है और बैंक द्वारा आवश्‍यक भुगतान सीधे किया जा सकता है। बेड पैमाने पर नकदी घट की अतिरंजना की एक प्रवृत्ति साक्ष्‍य के रूप में सामने आई है। इस क्षेत्र में कार्य हो कि दोनों क्षेत्रों में चाहे खेती हो या विशेष ॠणी दोनों में वास्‍तविकता का पुट हो (जैसे उनके द्वारा कार्यरत मजदूरों की संख्‍या, उनकी अपनी और परिवार की आवश्‍यकता की खपत) आमतौर पर नकदी घटक सूचनाओं के मूल्‍य का 30% के आसपास ही होता है।
मध्‍यम अवधि के ॠणों में मानदण्‍ड प्रस्‍तावित निवेश से होने वाली आय की संभावना पर ज्‍यादा निर्भर करता है न कि जो ता आकार जैसे एक निश्चित क्षेत्रफल में कंपोजिट कुआं खोदना या पंपसेट के लिए ॠण उनी फसल पद्धति के लिए लाभकारी हो सकता है वहीं दूसरे क्षेत्र में सच नहीं हो सकता। यदि ॠण नाबार्ड योजनओं के तहत दी है, शाखाओं को नाबार्ड की यूनिट कॉस्‍ट कमेटी द्वारा निर्धारित यूनिट लागता का पालन करना चाहिए।
मार्जिन उधारकता के प्रकार एवं गतिविधि पर निर्भर हैं। प्राथमिकता क्षेत्र के अन्‍तर्गत 0-25% तक भिन्‍न होता है।
कोई मार्जिन नहीं पर जोर है।
गैर फार्म क्रियाओं के लिए रू.25000/- तक की गतिविधियों पर मार्जिन माफ है।
रू. 25000/- तक के कृषिॠण अतिरिक्‍त सुरक्षा से परे रखे गए है जहां बैंक वित्‍त द्वारा प्रतिभूति बनाई जा रही है।
चूंकि बैंकों को विभिन्‍न एजेंसियों से विज्ञापन के जरिए तदर्थ ॠण किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संपर्क रखना पड़ता है अत: यह अच्‍छा होगा कि वे खेतिहर को उनकी निर्दिष्‍ट उद्देश्‍य के लिए उनकी पूरी जोत बंधक करने की सलाह दें न कि जोत के एक भाग को।

ॠणी के पहचान लिए फोटो जरूरी है शाखाएं इसके लिए स्‍वयं व्‍यवस्‍था करे और कमजोर वर्ग के श्रेणी के ॠणियों का खर्च स्‍वयं वहन करें।
आवेदन प्राप्‍त / स्‍वीकृत / अस्‍वीकृत प्रस्‍ताव का रजिस्‍ट रखें।
एसजीएसवाई लाभार्थियों को पास बुक दें।
नोट जहां अनुदान उपलब्‍ध हो उसे मार्जिन माना जाना चाहिए न कि अलग से और कोई  मार्जिन निर्धारित करें।
मौसम एवं समय
बैंकों को संचालन शुरू करने के पूर्व ग्राहकों के मध्‍य अच्‍छी तरह से प्रचार करना चाहिए (जैसे मई के मध्‍य में खरीफ तथा सितम्‍बर के अन्‍त में रबी का प्रचार किया जाए) उससे यह सुनिश्चित हो जाएगा वितरण के समय राशि संवितरण हेतु तैयार रखी जाए।
मध्‍य अवधि ॠण संवितरण का उपयुक्‍त समय ऑफ सीजन होगा जब खेतिहर अपनी फसल के साथ व्‍यस्‍त नहीं होगा (मार्च से मई और सितम्‍बर से अक्‍टूबर)
भुगतान एवं वसूली कार्य निष्‍पादन
मध्‍यावधि एवं अल्‍पावधि ॠण देनों के लिए ॠण की चुकौती का समय वो हो जब खेतिहर अपनी फसल को बेचकर तरलता रख सके। अत: शाखा प्रबन्‍धक बाजार आगमन और सभी मुख्‍य फसलों के शीर्ष बिक्री समयावधि का अध्‍ययन करें। ॠण की तारीख इस प्रकार को सूचना के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। कृषकों को उनके उत्‍पादन की अच्‍छी कीमत मिल जाए इस बात का भी ध्‍यान रखें।

देय तारीख से पहलू वसूली के प्रयास शुरू कर दिए जाने चाहिए। यह पाया गया है कि वे बैंक जो नियमित समय पर सूचनाएं एवं अनुस्‍मारक भेजना शुरू कर देते है एवं जिना फील्‍ड स्‍टाफ समय पर सतर्क होकर तैयार रहता है उनको वसूली के समय ज्‍यादा पर परेशानी नहीं होती है। शाखा प्रबंधक वसूली की गतिविधियों में सुस्‍त न हो लेकिन उचित कार्यवाही करें।
जहां विविध फसल प्रक्रिया अपनाई जा रही है या दो मौसमी फसल उगाई जाती है यह आवश्‍यक है कि मुख्‍य फसल दूसरी है जिस पर निर्वाह किया जा रहा है तब फसल की बाजार में बिक्री और वसूली की तारीख में तालमेल रखा जाए। यह अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है कि किसानों में नियमित भुगतान करने की आदत डाली जाए। यदि उनमें चूक करने की भावना हट जाएगी तब स्‍वत: विकास होगा।
कृषक को चुकौती क्षमता पैदावार की उन्‍नत तकनीकों को अपनाने पर निर्भर करेगी। सकल उत्‍पादन बहुत बढ़ा कर नहीं दिखाया जाना चाहिए। साधारणत: उपज के कुल मूल्‍य का 50% का दो तिहाई अल्‍पावधि फसली ॠण के लिए तथा शेष मध्‍यावधि ॠणों के विकास के लिए उपलब्‍ध रहता है।
अल्‍प एवं मध्‍यावधि ॠण आवश्‍यकताओं के बीच सामंजस्‍य वसूली की दृष्टि से अच्‍छा है। विकास ॠणों को चुकाना उगाई गई फसल से प्राप्‍त आय पर निर्भर है। यदि ॠण दाता बैंक उगाई जाने वाली फसल के लिए उन्‍नत तकनीकों की आवश्‍यकता को ध्‍यान में नहीं रखते है वसूली की संभावनाएं स्‍वत: क्षीण हो जाती है। ऐसा बहुत से फसल की अनुभव रहा है जिन्‍होंने उगाई जाने वाली फसल की आवश्‍यकताओं को नजरअन्‍दाज किया है। वसूली कार्यक्रम हर समय पर्याप्‍त रूप में लचीला हो ताकि प्राकृतिक आपदाओं या प्रतिकूल मौसमी कारकों के समय पुन:चरणबद्धता (रीफेसिंग) अपनाई जा सके।
यह अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है कि वसूली कार्य प्रत्‍येक क्षेत्र और हर मौसम में निरन्‍तक रहें और उनकी समीक्षा की जाती रहे। इस संबंध में वसूली निष्‍पादन ॠण खाते में उठाई गई मांग की कुछ देयता पर आधारित नहीं सम्‍बद्ध होना चाहिए। अत: प्रत्‍येक शाखा की मांग, संग्रह एवं शेष रजिस्‍टर एवं नियत तारीख रजिस्‍टर बनाए।
चुकौती सूची निर्वाह की आवश्‍यक उत्‍पादन क्षमता, लाभार्जन क्षमता को देखते हुए तय की जानी चाहिए। रू.50000/- तक के कुटीर उद्योगों, दस्‍तकारों को ॠण की चुकौती अनुसूची मीयादी ॠण घटक के लिए निर्धारित की जा सकती है। सूखा, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रभावित होने पर चूक की स्थित में फसली ॠण को उसे 5 वर्ष के मध्‍यावधि ॠण में परिवर्तित किया जा सकता है तथा विस्‍तार/रीफेसमेंट के  लिए अनुमति दी जा सकती है।
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित चूक होने पर अन्‍य ॠणियों द्वारा प्रतिभूत के मूल्‍य से अधिक आहरण को एक उचित अवधि के लिए मध्‍यावधि ॠण में परिवर्तित किया जा सकता है।
क्रेडिट फ्लो पैरामीटर (भारत सरकार द्वारा निर्धारित)

अग्रिम का प्रतिशत
1. कुल अग्रिम का 40% प्राथमिकता प्राप्‍त क्षेत्र
2. प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष्‍ज्ञ कृषि अग्रिम 18% (अप्रत्‍यक्ष ॠण कुल कृषि के 25% से अधिक न हों)
3. छोटे एवं लघु उद्योग क्षेत्र में लघु व्‍यवसाय (SSSBEs) कुल लघु उद्योग अग्रिम का 40%
4. कमजोर वर्ग को अग्रिम प्राथमिका प्राप्‍त क्षेत्र के 25% या शुद्ध अग्रिम का 10%
5. विभेदक ब्‍याज दर (डीआरआई) पिछले साल के कुल अग्रिमों के बकाया का 1%
6. ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी शाखाओं के माध्‍यम से कुल डीआरआई अग्रिमों को दो तिहाई डीआरआई अग्रिम।
7. डीआरआई से इतर डीआरआई अग्रिम के 40% हिस्‍सा एससी/एसटी को।



Saturday, 7 February 2015

यूको शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत द्वितीय ऋण

यूको शिक्षा ऋण का प्रमुख उद्देश्‍य यह है कि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र वित्‍तीय अभाव के कारण उच्‍च शिक्षा सं वंचित नहीं रह जाए । इसको ध्‍यान में रखते हुए हमारी शैक्षिक योजना " यूको एडुकेशन " संशोधित की गयी है ताकि स्‍नातकोत्‍तर/व्‍यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को दूसरा ऋण प्रदान किया जा सके

पात्रता :
वैसे छात्र, जिन्‍हें स्‍नातक पाठ्यक्रम के लिए हमारे बैंक द्वारा "यूको एडुकेशनऋण मंजूर किया गया हो अब वे पहले ऋण को पूरी तरह चुकाये जाने से पूर्व स्‍नातकोत्‍तर या व्‍यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्‍ययन करना चाहते है ।
वित्‍त की मात्रा :
आवश्‍यकता आधारित यह वित्‍त अभिभावकों / छात्रों की चुकौती क्षमता के अधीन किन्‍तु समग्र सीमा (दोनों ऋणों की संयुक्‍त सीमा) के अंतर्गत होगा ।
भारत में अध्‍ययन के लिए रु.10 लाख और विदेशों में अध्‍ययन के लिए रु.20 लाख
महत्‍वपूर्ण शर्त :
प्रथम ऋण का पूरा संचित ब्‍याज, नए ऋण के संवितरण से पहले अभिभावकों द्वारा जमा किया जाना चाहिए ।
परिचालनात्‍मक दिशा-निर्देश :
अधारकर्ता के नाम से केवल एक ही ऋण खाता होगा ।
अद्यतन ब्‍याज की उदायगी के बाद प्रथम ऋण के मूलधन को द्वितीय ऋण में स्थानांतरित किया जाएगा ।
केवल एक ही चुकौती होगी ।
सम्‍पूर्ण राशि के लिए नए दस्‍तावेज बनाये जायेंगे ।
अन्‍य सभी निबंधन और शर्तें, जिनका यथोक्‍त प्रथम ऋण में उल्‍लेख किया गया है, यथावत रहेंगे।
संदर्भ :
सीएचओ /सीआर-पीएस/12/04.05 दि. 02.07.04 - परिचालनात्‍मक दिशा-निर्देश
सीएचओ /सीआर-पीएस /28/04-05 दि. 21.08..04 - परिचालनात्‍मक दिशा-निर्देश
सीएचओ /सीआर-पीएस /38/04-05 दि. 06.10..04 - परिचालनात्‍मक दिशा-निर्देश
सीएचओ /सीआर-पीएस /58/05-06 दि.  24.01..06 - जमानत मानदंड में संशोधन
सीएचओ /सीआर-पीएस /07/06-07 दि. 20.04..06- वित्‍त के लिए बैंक की निकटतम शाखा
सीएचओ /सीआर-पीएस /32/06-07 दि. 09.12..06- समय-सीमा के भीतर शिक्षा ऋण का निपटान
सीएचओ /सीआर-पीएस /36/07-08 दि. 12.09.07- शिक्षा ऋण में ऋण देने का शक्ति
     








यूको शिक्षा ऋण (संशोधित)

शिक्षा ऋण का आरंभ 1981 में वेपा कामेसम समिति की सिफारिश के अनुसार किया गया था। इस योजना में समय-समय पर कई संशोधन किए गए । हाल ही में, आईबीए ने वित्‍त मंत्रालय के निर्देश के अनुसार शिक्षा ऋण की आदर्श योजना तैयार किया है । भारतीय बैंकर्स संघ द्वारा बनाई गई और विकसित की गई शिक्षा ऋण योजना को हमारे प्रधान कार्यालय ने अपनाया है । यह ऋण योजना इस संबंध में पहले सभी अनुदेशों को खारिज करती है और इस योजना का विवरण इस प्रकार है -

योजना का उद्देश्‍य और विस्‍तार :
योग्‍य छात्र वित्‍तीय सहायता के अभाव के कारण उच्‍च शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए ।
दो प्रमुख योजनाएं हैं। 1) भारत में अध्‍ययन 2) विदेशों में अध्‍ययन

I. निम्नलिखित के लिए भारत में अध्‍ययन-
1)   स्नातक पाठ्यक्रम जैसे बी.ए, बी.एस.सी, और बी.कॉम आदि
2) स्नातकोत्‍तर पाठ्यक्रम जैसे एम.ए, एम.एस सी और एम.कॉम आदि
3)  पीएच.डी.पाठ्यक्रम
4)  व्‍यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे इंजीनियरी, मेडिकल, कृषि, पशुचिकित्‍सा, विधि, दंत चिकित्‍सा,  प्रबंधन, कंप्‍यूटर, आइ सी डब्‍लयू ए, सी.ए, सीएफए आदि
5) यूजीसी/सरकार/एआईसीटीई/एआईबीएमएस/आइसीएमआर आदि द्वारा अनुमोदित कॉलेजो/ विश्‍वविद्यालयों द्वारा आयोजित डिप्‍लोमा/डिग्री के अन्‍य पाठ्यक्रम आदि
6) इलेक्‍ट्रॉनिक विभाग या कुछ प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालयों द्वारा अंगीभूत प्रतिष्ठित संस्‍थानों से कंप्‍यूटर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
7) आईआईएम, आईआईटी, आईआईएससी, एक्‍सएलआरआई, एनआइएफटी आदि द्वारा आयोजित पाठ्यक्रम
8) प्रतिष्ठित विदेशी विश्‍वविद्यालयों द्वारा भारत में प्रस्‍तावित पाठ्यक्रम
9) अनुमोदित संस्‍थानों द्वारा आयोजित सायंकालीन पाठ्यक्रम
10) राष्‍ट्रीय संस्‍थानों और अन्‍य प्रतिष्ठित निजी संस्‍थानों द्वारा प्रस्‍तावित पाठ्यक्रम

II. विदेशों में अध्‍ययन
1) स्‍नातक प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालयों द्वारा संचालित रोजगार उन्‍मुखी व्यवसायिक/तकनीकी  पाठ्यक्रम
2) स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रम जैसे एमसीए, एमबीए, एमएस आदि
3) प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालयों में शोध कार्य/व्यवसायिक पाठ्यक्रम
4) सीआईएमए लंडन, यूएसए में सीपीए द्वारा संचालित पाठ्यक्रम

उधारकर्ता की पात्रता
1) छात्र भारतीय नागरिक होना चाहिए ।
2) प्रवेश परीक्षा/मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया के द्वारा भारत में व्यवसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रमों में  दाखिला लिया हो
3) प्रवेश परीक्षा/मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया के द्वारा विदेशी विश्‍वविद्यालयों/संस्‍थानों में दाखिला लिया हो
आयु-सीमा :

व्यवसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और रोजगार उन्‍मुखी डिप्‍लोमा और स्‍नातक पाठ्यक्रमों के लिए उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए । 
यदि छात्र की उम्र 18 वर्ष से कम है तो सक्षम प्राधिकारी उम्र सीमा में छूट दे सकते हैं । ऋण मंजूर करने वाले प्राधिकारी सामान्‍य श्रेणी के छात्रों के मामले में उपरी आयु सीमा 28 वर्ष और अ.जा./अ.ज.जा. के उम्‍मीदवारों के मामले में 30 वर्ष तक छूट दे सकते हैं । स्‍नातकोत्‍तर और शोध कार्य के लिए आयु सीमा 21 वर्ष से 28 वर्ष होनी चाहिए । ऋण मंजूर करने वाले प्राधिकारी अपने विवेक से उपर आयु सीमा में सामान्‍य श्रेणी के उम्‍मीदवारों के लिए 30 वर्ष और अजा/अजजा के लिए 33 वर्ष तक छूट दे सकते हैं । सभी मामलों में अभिभावक अर्थात् माता-पिता सह-उधारकर्ता होंगे ।
योजना के अंतर्गत व्‍यय के लिए पात्रता:-
1) पाठ्यक्रम शुल्‍क
2) छात्रावास/बोर्डिंग शुल्‍क
3) पुस्‍तकों की कीमत और अध्‍ययन के लिए आवश्‍यक जर्नल
4) पाठ्यक्रमों के लिए अपेक्षित स्‍टेशनरी और उपकरण
5) परीक्षा शुल्‍क/पुस्‍तकालय/प्रयोगशाला शुल्‍क
6) सुरक्षा जमा/बिल्डिंग फंड/यूनिफॉर्म आदि
7) यदि पाठ्यक्रम के लिए आवश्‍यक हो तो कंप्‍यूटर की खरीद (जो बैंक के प्रति दृष्टिबंधक होगा)
8) पाठ्यक्रम पूरा करने हेतु अपेक्षित कोई अन्‍य खर्च  जैंसे स्‍टडी टूर, परियोजना कार्य, शोध-प्रबंध आदि
9) विदेशों में अध्‍ययन के मामले में उपरोक्‍त के साथ वायु टिकट


वित्तीयन  की प्रमात्रा :-
आवश्यकता आधारित यह वित्‍त अभिभावकों/छात्रों की चुकौती क्षमता के आधार पर  इस प्रकार होगा;
भारत में अध्‍ययन हेतु अधिकतम रु.10 लाख
विदेशों में अध्‍ययन हेतु अधिकतम रु.20 लाख (विनिमय नियंत्रण विनियमों के अनुपालन के अधीन)
संवितरण और अन्‍य महत्‍वपूर्ण दिशा-निर्देश :
  • परिवार/अभिभावकों की आय के लिए कोई सीलिंग नहीं है ।
  • शिक्षा ऋण का कोई भी आवेदन अगले उच्‍चतर प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना अस्‍वीकार नहीं किया जाएगा ।
  • स्‍टाफ संबंधी मामलों में ऋण, मंजूरी देने वाले प्राधिकारी से एक श्रेणी उपर के प्राधिकारी द्वारा मंजूर किया जाएगा ।
  • इस आशय की घोषणा/शपथपत्र लिया जाएगा कि अन्‍य बैंकों से कोई ऋण नहीं लिया गया है।
  • ऋण एप्रेजल के दौरान छात्र द्वारा भविष्‍य में  आय की संभावना पर विचार  किया जाना चाहिए । यदि आवश्‍यक होतो अभिभावक/माता-पिता की संपत्ति/आय को भी चुकौती क्षमता को निर्धारित करने के लिए देखा जा सकता है ।
  • संपूर्ण वित्‍त प्राथमिकताप्राप्‍त क्षेत्र अग्रिम के रूप में होगा ।
  • अं.प्र., रु.4 लाख तक के ऋणों के लिए किसी भी नियम में छूट दे सकते हैं ।
  • म.प्र. रु.4 लाख से अधिक के ऋणों के लिए किसी भी नियम में छूट दे सकते हैं ।
  • शिक्षा ऋणों के लिए कोई भी प्रोसेसिंग और अप फ्रंट शुल्‍क नहीं लिया जाएगा ।
  • छात्र के प्रगति रिपोर्ट के संबंध में नियमित अंतराल पर शाखा, शैक्षिक संस्‍धानों से संपर्क करेगी।
  • उस शाखा की प्राथमिकता दी जाएगी, जो उधारकर्ता के निवास से नजदीक हो ।
  • ऋण का संवितरण आवश्‍कता/मांग के अनुसार चरणों में यधासंभव सीधे संस्‍थानों/पुस्‍तकों/ उपकरणों/उपष्करों के विक्रेताओं को किया जाएगा ।

चुकौती अवधि  -
  • पाठ्यक्रम अवधि + एक वर्ष या नौकरी प्राप्‍त करने के 6 महीने, जो भी पहले हो, से चुर्काती आरंभ की जाएगा ।
  • ऋण मोरोटोरियम के बाद 5-7 वर्षों में चुकायी जाएगी ।
  • यदि छात्र निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर सकता तो पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिकतम 2 वर्षों का समय और दिया जा सकता है ।
  • यदि छात्र इसके बावजूद भी पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम नहीं हो और कारण उसके नियंत्रण में नहीं हों तो मंजूरी देने वाले प्राधिकारी अपने विवेक से चाहें तो पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए यथाआवश्‍यक अवधि का विस्‍तार दे सकते हैं ।
  • मोराटोरियम अवधि में उपचित ब्‍याज, मूलधन और तय किए जाने वाले ई एम आई में जोड़ दिया जाएगा ।



\ब्‍याज दर
·         रु.4 लाख सहित तक की सीमा बीपीएलआर 1.0%
= 11=25% (10.07.09 से प्रभावी)
·         रु.4 लाख से अधिक की समा -  बीपीएलआर 0.5%= 11.75%
·         डी आर आई मानदंड पूरा करने वाले / विकलांग छात्र    -  4%
·         मोराटोरियम अवधि/चुकौती अवकरश के दौरान ब्‍याज तिमाही/अर्धवार्षिक रूप में सामान्‍य आधार पर डेबिट किया जाएगा ।
·         केवल रु.4 लाख से अधिक की सीमा के लिए ओवरड्यू अवधि के लिए आवेरड्यू राशि पर 2% प्रति वर्ष की दर से दांडिक ब्‍याज लगेगा ।

ऋण राशि का आंकलन
ऋण की राशि का आंकलन करते समय निम्‍नलिखित बातों पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए
ए) भावी रोजगार की संभावना
बी) संभावित वास्‍तविक आय
सी) कुल अवधि के लिए ब्‍याज की राशि
डी) मोराटोरियम अवधि के दौरान यदि ब्‍याज शुरू से नहीं दिया जाए तो यह भार प्रधिक हो जाएगा । अतएवं, चुकौती की समय, अवधि चुकौती क्षमता का अभिनिश्‍चय करके ही शुरू करना चाहिए ।

शक्तियों का प्रत्यायोजन : (दिनांक 12.09.07 से प्रभावी)
                        स्‍केल – I                   स्‍केल – II        स्‍केल III
   ऋण की राशि (लाख में)     4.0              7.5           7.5

मार्जिन :
·         रु.4 लाख तक कोई मार्जिन नहीं
·         रु.4 लाख से अधिक भारत में अध्‍ययन हेतु 5% और विदेशों के लिए 15%
·         स्‍कॉलरशिप/सहायता मार्जिन में शामिल किया जाएगा ।
·         संवितरण के समय वार्षिक आधार पर मार्जिन तय किया जाएगा ।



जमानत
·         रु.4 लाख तक के लिए कोई जमानत नहीं
·         रु.4 लाख से अधिक और रु.10 लाख तक के लिए -
·         संतोषजनक तृतीय पक्ष गारंटी
·         ऋण के 100% के बराबर संपाशिर्वक जमानत या ऋण के 100% के लिए अभिभावकों/माता-पिता/तृतीय पक्ष का सह-दायित्‍व । तृतीय पक्ष गारंटी से छूट दी जा सकती है यदि माता-पिता का नेटवर्थ/संपत्ति संतोषजनक है । इस स्थिति में माता-पिता संयुक्‍त उधारकर्ता होंगे ।
·         जमानत भूमि/भवन, तरल लिखतों, एलआईसी, स्‍वर्ण, शेयर, बैंक जमा आदि के रूप में हो सकता है ।
दस्‍तावेजीकरण :
 i) निर्धारित फॉर्मेट - ए 48 (संशोधित-भाग-1) में आवेदन पत्र
ii)  फॉर्मेट - ए 48 (संशोधित - भाग 2) में अध्‍ययन के दौरान उपचित ब्‍याज और रोजगार प्राप्ति के बाद संभावित वेतन को शामिल करते हुए व्‍यवहार्यता आकलन विस्‍तार से किया जाना चाहिए।
iii) ए 49 बी की अनुसार बैंक और उधारकर्ता तथा गारंटर के बीच एक करार किया जाना चाहिए, जो करार के रूप में विधिवत् मुद्रांकित होना चाहिए ।
iv)  गारंटर की संपत्ति की विवरणी और पीएस वी आर -1 और पीएस वी आर-2 रिपोर्ट 1 संपत्ति के मार्टगेज की स्थिति में, पी एस वी आर-4 तथा पीडी आई आर सहित ऐसे मामलों पर लागू सभी कागजात तैयार और प्राप्‍त किया जाना चाहिए ।

सक्षमता प्रमाणपत्र :
मंजूर करने वाले प्राधिकारी उच्‍च शिक्षा के लिए विदेश जा रहे छात्रों को सक्षमता प्रमाणपत्र भी जारी कर सकते हैं । इसके लिए, यदि आवश्‍यक हो तो आवेदक से वित्‍तीय और अन्‍य समर्थक दस्‍तावेजों को मांगा जा सकता है । कुछ विदेशी विश्‍वविद्यालय उच्‍च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों के बैंकरों से यह प्रमाणपत्र मांगते हैं ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि छात्र अध्‍ययन पूरा करने तक व्‍यय करने में सक्षम हैं ।


लाभ ही क्यों?

किसी भी संस्थान के लिए लाभ ही मूल मंत्र होता है।जो उसके परिचालनगत सामर्थ और स्थाईत्व परप्रकाश डालता है।इसलिए हमारे बैंक का मिशन भी वही है कि कारबार और लाभप्रदता में सतत वंद्धि करते हुए सर्वोत्तम श्रेणी का बैंक कहलाना।लाभप्रदता किसी भी संस्थान की परिचालनगत क्षमता को दर्शाता है।यदि उचित लाभ के बिना संवृद्धि हो रही है तो यह माना जाएगा किबैंकिंग कारबार सही तरीके से नही हो रहा है।बैंक जैसी संस्थानों के लिए यह आवश्यक है कि वह लाभ में लगातार वृद्धि करते रहे इसके लिए यह हो सकता है कि बैंक को हाई रिस्क जैसे ऋण प्रदान करने वाले कार्य भी करने पड़े। 

चालू खाता किसे कहते हैं?

चालू खाता विशेष तरह का खाता होता है जो कि ट्रेडर / कारबारियों इत्यादि के लिए उपयुक्त माना जाता है। ट्रेडर / कारबारियों को समय समय पर अपने खातों में जमा और आहरण दोनों करने होते है।इन खातों में बच्त खाते की तरह आहरण पर किसी प्रकार की लोई बंदीश नही होती है

कौन चालू खाता खोल सकता है?
* एक या एक से अधिक व्यक्तिय
* प्रोप्राइटरशिप
* पार्टनरशिप फर्म-रर्जिस्टर्ड या अनरजिस्टर्ड
* ज्वॉइट स्टॉक कम्पनि
* एच यू एफ
* लोकल बॉडी
* सरकारी विभाग/कोर्पोरेशन/सार्वजनिक उपक्रम
* कोई बैंक
* ट्रस्ट
* प्रोविडेंट फण्ड ऑर.
* अन्य निष्पादक, प्रशासक,इत्यादि.

कौन चालू खाता नही खोल सकता है?
* एक या एक से अधिक व्यक्ति
* अंधा व्यक्ति
* अवस्यक
* अनपढ़
* कोई भी व्यक्ति जिनका खाता का परिचालन अंगूठे के निशान द्वारा ,किसी निशान के द्वारा होता हो ।
* जो दूसरे बैंकों से क्रेडिट लिमिट (निधि आधारित+गैर निधि आधारित) की सुविधा लिए हुए हैं उनसे बिना अनापत्ति पत्र प्राप्त किए वे अपना खाता नही खोल सकते हैं।

खाते में परिचय :
सभी चालू खाते में सही तरीके से परिचय प्राप्त कर लेना होगा।
वह व्यक्ति बैंक का परिचित कोई होना चाहिए और जो बैंक के लिए स्वीकार्य हो।
प्रबंधक या कोई अन्य स्टाफ सदस्य ।
विद्यमान चालू खाता धारक जिनका बैंक के साथ विगत 6 माह से संतोषजनक लेनदेन हो रहा है परिचय दे सकते हैं।
परिचय लेते समय खाता खोलनेवाले का सही पहचान होना आवश्यक होता है ।

यदि परिचय कर्ता स्वंय बैंक में उपस्थित नही हो पाता है तो उनसे लिखित में उसकी पुष्टि प्राप्त करनी होती है। जब तक यह बैंक को उपलब्ध न हो वह उस खाते में चेक इत्यादि जमा नही लेगें।